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वाल्मीकि रामायण 37.29

कथं वा ऽल्पशरीरस्त्वं मामितो नेतुमिच्छसि ।
सकाशं मानवेन्द्रस्य भर्तुर्मे प्लवगर्षभ ।। ५.३७.३०।।।।

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