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वाल्मीकि रामायण 37.23

पृष्ठमारोह मे देवि मा विकाङ्क्षस्व शोभने ।
योगमन्विच्छ रामेण शशाङ्केनेव रोहिणी ।। ५.३७.२४।।।।

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