ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3636.6वाल्मीकि रामायण 36.6ततः सा ह्रीमती बाला भर्तृसन्देशहर्षिता । परितुष्टा प्रियं कृत्वा प्रशशंस महाकपिम् ।। ५.३६.६।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय