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वाल्मीकि रामायण 36.4

गृहीत्वा प्रेक्षमाणा सा भर्तुः करविभूषणम् ।
भर्तारमिव सम्प्राप्ता जानकी मुदिता ऽभवत् ।। ५.३६.४।।।।

पूरा अध्याय