ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3535.88वाल्मीकि रामायण 35.88एतत्ते सर्वमाख्यातं समाश्वसिहि मैथिलि । किं करोमि कथं वा ते रोचते प्रतियाम्यहम् ।। ५.३५.८८।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय