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वाल्मीकि रामायण 35.54

आदिष्टा वानरेन्द्रेण सुग्रीवेण महौजसा ।
अद्रिराजप्रतीकाशाः सर्वतः प्रस्थिता महीम् ।। ५.३५.५४।।।।

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