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वाल्मीकि रामायण 35.34

ततः स सान्त्वयामास सुग्रीवं लक्ष्मणाग्रजः ।
स्त्रीहेतोर्वालिना भ्रात्रा निरस्तमुरुतेजसा ।। ५.३५.३४।।।।

पूरा अध्याय