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वाल्मीकि रामायण 35.24

त्वामेव मार्गमाणौ तौ विचरन्तौ वसुन्धराम् ।
ददर्शतुर्मृगपतिं पूर्वजेनावरोपितम् ।। ५.३५.२४।।।।

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