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वाल्मीकि रामायण 35.20

दशपद्मो दशबृहत् त्रिभिर्व्याप्तो द्विशुक्लवान् ।
षडुन्नतो नवतनुस्त्रिभिर्वाप्नोति राघवः ।। ५.३५.२०।।।।

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