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वाल्मीकि रामायण 34.41

नाहमस्मि तथा देवि यथा मामवगच्छसि ।
विशङ्का त्यज्यतामेषा श्रद्धत्स्व वदतो मम ।। ५.३४.४१।।

पूरा अध्याय