ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 3333.7वाल्मीकि रामायण 33.7किन्नु चन्द्रमसा हीना पतिता विबुधालयात् । रोहिणी ज्योतिषां श्रेष्ठा श्रेष्ठसर्वगुणान्विता ।। ५.३३.७।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय