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वाल्मीकि रामायण 30.40

कथं नु खलु वाक्यं मे श्रुणुयान्नोद्विजेत वा ।
इति संचिन्त्य हनुमांश्चकार मतिमान् मतिम् ।। ५.३०.४०।।।।

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