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वाल्मीकि रामायण 30.16

अन्तरं त्वहमासाद्य राक्षसीनामिह स्थितः ।
शनैराश्वासयिष्यामि सन्तापबहुलामिमाम् ।। ५.३०.१६।।।।

पूरा अध्याय