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वाल्मीकि रामायण 30.14

सीतासन्देशरहितं मामितस्त्वरया गतम् ।
निर्दहेदपि काकुत्स्थः क्रुद्धस्तीव्रेण चक्षुषा ।। ५.३०.१४।।।।

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