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वाल्मीकि रामायण 3.44

उवाचागर्वितम् वाक्यम् हनूमन्तम् प्लवङ्गमम् ।
प्रसीद सुमहाबाहो त्रायस्व हरिसत्तम ॥५-३-४४॥

पूरा अध्याय