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वाल्मीकि रामायण 3.22

पुरस्तत्क पिवर्यस्य वायुसूनोरतिष्ठत ।
मुञ्चमाना महानादमब्रवीत्पवनात्मजम् ॥५-३-२२॥

पूरा अध्याय