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वाल्मीकि रामायण 3.18

ताम् रत्न वसन उपेताम् कोष्ठ आगार अवतम्सकाम् ।
यन्त्र अगार स्तनीम् ऋद्धाम् प्रमदाम् इव भूषिताम् ॥५-३-१८॥

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