ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 33.18वाल्मीकि रामायण 3.18ताम् रत्न वसन उपेताम् कोष्ठ आगार अवतम्सकाम् । यन्त्र अगार स्तनीम् ऋद्धाम् प्रमदाम् इव भूषिताम् ॥५-३-१८॥पिछलाअगलापूरा अध्याय