वाल्मीकि रामायण 28.17
इतीव देवी बहुधा विलप्य सर्वात्मना राममनुस्मरन्ती ।
प्रवेपमाना परिशुष्कवक्त्रा नगोत्तमं पुष्पितमाससाद ।। ५.२८.१७।।।।
इतीव देवी बहुधा विलप्य सर्वात्मना राममनुस्मरन्ती ।
प्रवेपमाना परिशुष्कवक्त्रा नगोत्तमं पुष्पितमाससाद ।। ५.२८.१७।।।।