ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2727.44वाल्मीकि रामायण 27.44प्रणिपातप्रसन्ना हि मैथिली जनकात्मजा । अलमेषा परित्रातुं राक्षस्यो महतो भयात् ।। ५.२७.४४।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय