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वाल्मीकि रामायण 27.41

तदलं क्रूरवाक्यैर्वः सान्त्वमेवाभिधीयताम् ।
अभियाचाम वैदैहीमेतद्धि मम रोचते ।। ५.२७.४१।।।।

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