ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2727.35वाल्मीकि रामायण 27.35लङ्कां चेयं पुरी रम्या सवाजिरथकुञ्जरा । सागरे पतिता दृष्टा भग्नगोपुरतोरणा ।। ५.२७.३५।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय