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वाल्मीकि रामायण 27.20

एवं स्वप्ने मया दृष्टो रामो विष्णुपराक्रमः ।
लक्ष्मणेन सह भ्रात्रा सीतया सह भार्यया * ।। ५.२७.२०।।।।

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