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वाल्मीकि रामायण 27.17

पाण्डुरर्षभयुक्तेन रथेनाष्टयुजा स्वयम् ।
इहोपयातः काकुत्स्थः सीतया सह भार्यया ।। ५.२७.१७।।।।

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