Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 26.38

यदि कश्चित् प्रदाता मे विषस्याद्य भवेदिह ।
क्षिप्रं वैवस्वतं देव पश्येयं पतिना विना ।। ५.२६.३८।।।।

पूरा अध्याय