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वाल्मीकि रामायण 26.30

पुण्योत्सवसमुत्था च नष्टभर्त्री सराक्षसी ।
भविष्यति पुरी लङ्का नष्टभर्त्री यथा ऽङ्गना ।। ५.२६.३०।।।।

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