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वाल्मीकि रामायण 26.21

कृतं कर्म महत्तेन मां तथा ऽभ्यवपद्यता ।
तिष्ठता रावणद्वन्द्वे वृद्धेनापि जटायुषा ।। ५.२६.२१।।।।

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