ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2626.2वाल्मीकि रामायण 26.2उन्मत्तेव प्रमत्तेव भ्रान्तचित्तेव शोचती । उपावृत्ता किशोरीव विवेष्टन्ती महीतले ।। ५.२६.२।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय