ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2525.6वाल्मीकि रामायण 25.6सा त्वशोकस्य विपुलां शाखामालम्ब्य पुष्पिताम् । चिन्तयामास शोकेन भर्तारं भग्नमानसा ।। ५.२५.६।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय