ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2525.10वाल्मीकि रामायण 25.10सा निःश्वसन्ती दुःखार्ता शोकोपहतचेतना । आर्ता व्यसृजदश्रूणि मैथिली विललाप ह ।। ५.२५.१०।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय