ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2424.36वाल्मीकि रामायण 24.36यदि कश्चित्प्रदाता मे विषस्याद्य भवेदिह । क्षिप्रं वैवस्वतं देवं पश्येयं पतिना विना ।। ५.२४.३६।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय