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वाल्मीकि रामायण 24.1

प्रसक्ताश्रुमुखीत्येवं ब्रुवन्ती जनकात्मजा ।
अधोमुखमुखी बाला विलप्तुमुपचक्रमे ।। ५.२४.१।।।।

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