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वाल्मीकि रामायण 22.9

अवलीनः स निर्वाक्यो हनुमाञ्शिंशपाद्रुमे ।
सीतां सन्तर्जयन्तीस्ता राक्षसीरशृणोत्कपिः ।। ५.२२.९।।।।

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