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वाल्मीकि रामायण 22.6

यदिदं लोकविद्विष्टमुदाहरथ सङ्गताः ।
नैतन्मनसि वाक्यं मे किल्बिषं प्रतितिष्ठति ।। ५.२२.६।।।।

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