Utshovऐप डाउनलोड करें

वाल्मीकि रामायण 22.34

इमां हरिणलोकाक्षीं त्रासोत्कम्पपयोधराम् ।
रावणेन हृतां दृष्ट्वा दौर्हृदो मे महानभूत् ।। ५.२२.३४।।।।

पूरा अध्याय