ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2222.3वाल्मीकि रामायण 22.3मानुषी मानुषस्यैव भार्यात्वं बहु मन्यसे । प्रत्याहर मनो रामान्न त्वं जातु भविष्यसि ।। ५.२२.३।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय