ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2222.27वाल्मीकि रामायण 22.27कुरुष्व हितवादिन्या वचनं मम मैथिलि । अलमश्रुप्रपातेन त्यज शोकमनर्थकम् ।। ५.२२.२७।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय