ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2222.25वाल्मीकि रामायण 22.25आनीतासि समुद्रस्य पारमन्यैर्दुरासदम् । रावणान्तःपुरं घोरं प्रविष्टा चासि मैथिलि ।। ५.२२.२५।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय