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वाल्मीकि रामायण 22.16

सीते पर्याप्तमेतावद्भर्तृस्नेहो निदर्शितः ।
सर्वत्रातिकृतं भद्रे व्यसनायोपकल्पते ।। ५.२२.१६।।।।

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