ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2121.9वाल्मीकि रामायण 21.9ततो हरिजटा नाम राक्षसी वाक्यमब्रवीत् । विवृत्य नयने कोपान्मार्जारसदृशेक्षणा ।। ५.२१.९।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय