ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 2020.36वाल्मीकि रामायण 20.36इति प्रतिसमादिश्य राक्षसेन्द्रः पुनः पुनः । काममन्युपरीतात्मा जानकीं पर्यतर्जयत् ।। ५.२०.३६।।।।पिछलाअगलापूरा अध्याय