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वाल्मीकि रामायण 20.32

हस्तिपद्य श्वपद्यौ च गोपदीं पादचूलिकाम् ।
एकाक्षीमेकपादीं च पृथुपादीमपादिकाम् ।। ५.२०.३२।।।।

पूरा अध्याय