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वाल्मीकि रामायण 20.28

अवेक्षमाणो वैदेहीं कोपसंरक्तलोचनः ।
उवाच रावणः सीतां भुजङ्ग इव निःश्वसन् ।। ५.२०.२८।।।।

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