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वाल्मीकि रामायण 20.22

शूरेण धनदभ्राता बलैः समुदितेन च ।
अपोह्य रामं कस्माद्धि दारचाउर्य.म् त्वया क्र्तम् ।। ५.२०.२२।।।।

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