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वाल्मीकि रामायण 2.50

प्रदोषकाले हनुमांस्तूर्णमुत्प्लुत्य वीर्यवान् ।
प्रविवेश पुरीं रम्यां सुविभक्तमहापथाम् ॥५-२-५०॥

पूरा अध्याय