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वाल्मीकि रामायण 2.37

केनोपायेन पशेयं मैथिलीं जनकात्मजाम् ।
अदृष्टो राक्षसेन्द्रेण रावणेन दुरात्मना ॥५-२-३७॥

पूरा अध्याय