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वाल्मीकि रामायण 2.17

पाण्डुराभिः प्रतोLईभिरुच्चाभिरभिसंवृताम् ।
अट्टालकशताकीर्णां पताकाध्वजमालिनीम् ॥५-२-१७॥

पूरा अध्याय