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वाल्मीकि रामायण 18.6

स सर्वाभरणैर्युक्तो बिभच्छ्रियमनुत्तमाम् ।
तां नगैर्बहुभिर्जुष्टाम् सर्वपुष्पफलोपगैः ।। ५-१८-६।।

पूरा अध्याय