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वाल्मीकि रामायण 18.30

रावणोऽयम् महाबाहुरिति संचिन्त्य वानरः ।
अवप्लुतो महातेजा हनुमान्मारुतात्मजः ।। ५-१८-३०।।

पूरा अध्याय