ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1818.2वाल्मीकि रामायण 18.2षडङ्गवेदविदुषाम् क्रतुप्रवरयाजिनाम् । शुश्राव ब्रह्मघोषान् स विरात्रे ब्रह्मरक्षसाम् ।। ५-१८-२।।पिछलाअगलापूरा अध्याय