ग्रंथवाल्मीकि रामायणसुन्दरकाण्डसर्ग 1818.14वाल्मीकि रामायण 18.14राजहंसप्रतीकाशं चत्रं पूर्णशशिप्रभम् । सौवर्णदण्डमपरा गृहीत्वा पृष्ठतो ययौ ।। ५-१८-१४।।पिछलाअगलापूरा अध्याय